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गाँव का मन्नू
13-07-2014, 01:27 AM
Post: #11
"छ्होटे मालिक तो बस "उः आह उः" कर के रह गये. तब तक लाजवंती छ्होटे मालिक के एक दम पास पहुच गई और बिना किसी जीझक या शर्म के उनके हथियार को पकड़ लिया और बोली 'क्या मालिक कुच्छ गड़बड़ तो नही कर रहे थे पूरा खड़ा कर के रखा हुआ है. इतना क्यों फनफना रहा है आपका औज़ार, कही कुच्छ देख तो नही लिया'. इतना कह कर हस्ने लगी”.

“छ्होटे मालिक के चेहरे की रंगत देखने लायक थी. एक दम हक्के-बक्के से लाजवंती का मुँह तके जा रहे थे. अपना हाफ पॅंट भी उन्होने अभी तक नही उठाया था. लाजवंती ने सीधा उनके मूसल को अपने हाथो में पकड़ लिया और मुस्कुराती हुई बोली 'क्या मालिक औरतो को हगते हुए देखने आए थे क्या' कह कर खी खी कर के हस्ते हुए मुन्ना बाबू के औज़ार को ऐसे कस के मसला साली ने की उस अंधेरे में भी मालिक का लाल लाल मोटे पहाड़ी आलू जैसा सुपरा एक दम से चमक गया जैसे की उसमे बहुत सारा खून भर गया हो और लंड और फनफना के लहरा उठा".

" बड़ी हरम्खोर है ये लाजवंती, साली को ज़रा भी शरम नही है क्या"

"जिसने सारे गाओं के लोंडो का लंड अपने अंदर करवाया हो वो क्या शरम करेगी"

"फिर क्या हुआ, मेरा मुन्ना तो ज़रूर भाग गया होगा वाहा से बेचारा"

"मालकिन आप भी ना हद करती हो अभी 2 मिनिट पहले आपको बताया था कि आपका लाल बसंती के चुचो को दबा रहा था और आप अब भी उसको सीधा सीधा स्मझ रही हो, जबकि उन्होने तो उस दिन वो सब कर दिया जिसके बारे में आपने सपने में भी नही सोचा होगा"

चौधरायण एक दम से चौंक उठी "क्या कर दिया, क्यों बात को घूम फिरा रही है"

"वही किया जो एक जवान मर्द करता है"

"क्यों झूट बोलती हो, जल्दी से बताओ ना क्या किया"

"छ्होटे मालिक में भी पूरा जोश भरा हुआ था और उपर से लाजवंती की उकसाने वाली हरकते दोनो ने मिल कर आग में घी का काम किया. लाजवंती बोली "छोरियो को पेशाब और पाखाना करते हुए देख कर हिलाने की तैय्यारि में थे क्या, या फिर किसी लौंडिया के इंतेज़ार में खड़ा कर रखा है' मुन्ना बाबू क्या बोलते पर उनके चेहरे को देख के लग रहा था कि उनकी साँसे तेज हो गई है. उन्होने ने भी अबकी बार लाजवंती के हाथो को पकड़ लिया और अपने लंड पर और कस के चिपका दिया और बोले "हाई भौजी मैं तो बस पेशाब करने आया था' इस पर वो बोली 'तो फिर खड़ा कर के क्यों बैठे हो मालिक कुच्छ चाहिए क्या' मुन्ना बाबू की तो बाँछे खिल गई. खुल्लम खुल्ला चुदाई का निमंत्रण था. झट से बोले 'चाहिए तो ज़रूर अगर तू दे दे तो मेले में से पायल दिलवा दूँगा'. खुशी के मारे तो साली लाजवंती का चेहरा च्मकने लगा, मुफ़्त में मज़ा और माल दोनो मिलने का आसार नज़र आ रहा था. झट से वही पर घास पर बैठ गई और बोली 'हाई मालिक कितना बड़ा और मोटा है आपका, कहा कुन्वारियो के पिछे पड़े रहते हो, आपका तो मेरे जैसी शादी शुदा औरतो वाला औज़ार है, बसंती तो साली पूरा ले भी नही पाएगी' छ्होटे मालिक बसंती का नाम सुन के चौंक उठे कि इसको कैसे पता बसंती के बारे में. लाजवंती ने फिर से कहा ' कितना मोटा और लंबा है, ऐसा लंड लेने की बड़ी तमन्ना थी मेरी' इस पर छ्होटे मालिक ने नीचे बैठ ते हुए कहा 'आज तमन्ना पूरी कर ले, बस चखा दे ज़रा सा, बड़ी तलब लगी है' इस पर लाजवंती बोली 'ज़रा सा चखना है या पूरा मालिक' तो फिर मालिक बोले 'हाई पूरा चखा दे मेले से तेरी पसंद की पायल दिवा दूँगा'.

आया की बात अभी पूरी नही हुई थी कि चौधरैयन ने बीच में बोल पड़ी "ओह मेरी तो किस्मत ही फुट गई, मेरा बेटा रंडियों पर पैसा लूटा रहा है, किसी को लहनगा तो किसी हरम्जदि को पायल बाँट रहा है, कह कर आया को फिर से एक लात लगाई और थोड़े गुस्से से बोली "हरम्खोर, तू ये सारा नाटक वाहा खड़ी हो के देखे जा रही थी, तुझे ज़रा भी मेरा ख्याल ना आया, एक बार जा के दोनो को ज़रा सा धमका देती दोनो भाग जाते". आया ने मुँह बिचकाते हुए कहा "शेर के मुँह के आगे से नीवाला छीनने की औकात नही है मेरी मालकिन मैं तो बस चुप चाप तमाशा देख रही थी". कह कर आया चुप हो गई और चूत की मालिश करने लगी. चौधरैयन के मन की उत्सुकता दबाए नही दब रही थी कुच्छ देर में खुद ही कसमसा कर बोली "चुप क्यों हो गई आगे बता ना"

"फिर क्या होना था मालकिन, लाजवंती वही घास पर लेट गई और छ्होटे मालिक उसके उपर, दोनो गुत्थम गुत्था हो रहे थे. कभी वो उपर कभी मालिक उपर. छ्होटे मालिक ने अपना मुँह लाजवंती चोली में दे दिया और एक हाथ से उसके लहंगे को उपर उठा के उसकी चूत में उंगली डाल दी, लाजवंती के हाथ में मालिक का मोटा लंड था और दोनो चिपक चिपक के मज़ा लूटने लगे. कुच्छ देर बाद छ्होटे मालिक उठे और लाजवंती के दोनो टांगो के बीच बैठ गये. उस छिनाल ने भी अपने साड़ी को उपर उठा दिया और दोनो टाँगो को फैला दिया. मुन्ना बाबू ने अपना मुसलांड सीधा उसकी चूत के उपर रख के धक्का मार दिया. साली चुड़क्कड़ एक दम से मिम्याने लगी. इतना मोटा लंड घुसने के बाद तो कोई कितनी भी बड़ी रंडी हो उसकी हेकड़ी तो एक पल के लिए गुम हो ही जाती है. पर मुन्ना बाबू तो नया खून है, उन्होने कोई रहम नही दिखाया, उल्टा और कस कस के धक्के लगाने लगे"

"ठीक किया मुन्ना ने, साली रंडी की यही सज़ा है" चौधरैयन ने अपने मन की खुंदक निकाली, हालाँकि उसको ये सुन के बड़ा मज़ा आ रहा था कि उसके बेटे के लंड ने एक रंडी के मुँह से भी चीखे निकलवा दी.

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13-07-2014, 01:28 AM
Post: #12
"कुच्छ धक्को के बाद तो मालकिन साली चुदैल ऐसे अपनी गांद को उपर उच्छालने लगी और गपा गॅप मुन्ना बाबू के लंड को निगलते हुए बोल रही थी 'हाई मालिक फाड़ दो, हाई ऐसा लंड आज तक नही मिला, सीधा बच्चेदानी को छु रहा है, लगता है मैं ही चौधरी के पोते को पैदा करूँगी, मारो कस कस्के', मुन्ना बाबू भी पूरे जोश में थे, गांद उठा उठा के ऐसा धक्का लगा रहे थे कि क्या कहना, जैसे चूत फाड़ के गांद से लंड निकाल देंगे, दोनो हाथ से चुचि मसल रहे थे और, पका पक लंड पेल रहे थे. लाजवंती साली सिसकार रही थी और बोल रही थी 'मलिक पायल दिलवा देना फिर देखना कितना मज़ा कर्वौन्गि, अभी तो जल्दी में चुदाई हो रही है, मारो मालिक, इतने मोटे लंड वाले मालिक को अब नही तरसने दूँगी, जब बुलाओगे चली आउन्गि, हाई मालिक पूरे गाओं में आपके लंड के टक्कर का कोई नही है'. इतना कह कर आया चुप हो गई.

आया ने जब लाजवंती के द्वारा कही गई ये बात की पूरे गाओं में मुन्ना के लंड के टक्कर का कोई नही है सुन कर चौधरैयन के माथे पर बल पड़ गये. वो सोचने लगी कि क्या सच में ऐसा है. क्या सच में उसके लरके का लंड ऐसा है जो की पूरे गाओं के लंडो से बढ़ कर है. वो थोड़ी देर तक चुप रही फिर बोली "तू जो कुच्छ भी मुझे बता रही है वो सच है ना"

"हा मालकिन सो फीसदी सच बोल रही हू"

"फिर भी एक बात मेरी समझ में नही आती कि मुन्ना का इतना बड़ा कैसे हो सकता है जितना बड़ा तू बता रही है"

"क्यों मालकिन ऐसा क्यों बोल रही हो आप"

"नही ऐसे ही मैं सोच रही हू इतना बड़ा आम तौर पे होता तो नही, फिर तेरे मलिक के अलावा और किसी के साथ.................." बात अधूरी छ्होर कर चौधरैयन चुप हो गई. आया सब समझ गई और धीरे से मुस्कुराती हुई बोली "आरे मालकिन कोई ज़रूरी थोड़े ही है कि जितना बड़ा चौधरी साहब का होगा उतना ही बड़ा छ्होटे मालिक का भी होगा, चौधरी साहब का तो कद भी थोड़ा छ्होटा ही है मगर छ्होटे मालिक को देखो इसी उमर में पूरे 6 फुट के हो गये है". बात थोड़ी बहुत चौधरैयन के भेजे में भी घुस गई, मगर अपने बेटे के अनोखे हथियार को देखने की तमन्ना भी शायद उसके दिल के किसी कोने में जाग उठी थी.

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14-07-2014, 12:22 AM
Post: #13
मुन्ना उसी समय घर के आँगन से मा ......मा पुकारता हुआ अपनी मा के कमरे की ओर दौड़ता हुआ आया और पूरी तेज़ी के साथ भड़ाक से चुधरैयन के कमरे के दरवाजे को खोल के अंदर घुस गया. अंदर घुसते ही उसकी आँखे चौधिया गई. कलेजे पर जैसे बिजली चल गई. मुँह से बोल नही फुट रहे थे. चौधारायन लगभग पूरी नंगी और आया अधनंगी हो के बैठी थी. मुन्ना की आँखों ने एक पल में ही अपनी मा का पूरा मुआयना कर डाला. ब्लाउस खुला हुआ था दोनो बड़ी बड़ी गोरी गोरी नारियल के जैसी चुचिया अपनी चोंच को उठाए खड़ी थी, साडी उपर उठी हुई थी और मोटे मोटे कन्द्लि के खम्भे जैसे जंघे ट्यूब लाइट की रोशनी में चमक रही थी. काले घने झांतो के जंगल में घिरी चूत तो नही दिख रही थी मगर उन झांतो के उपर लगा चूत का रस अपनी कहानी बयान कर रहा था. .ना तो आया ना ही चौधरैयन के मुँह से कोई कुच्छ निकला. कुच्छ देर तक ऐसे ही रहने के बाद आया को जैसे कुच्छ होश आया उसने जल्दी से जाँघो पर साड़ी खींच दी और साड़ी के पल्लू से दोनो चुचियों को धक दिया. अपने नंगे अंगो के ढके जाने पर चौधरैयन को जैसे होश आया वो झट से अपने पैरो को समेटे हुए उठ कर बैठ गई. चुचियों को अच्छी तरह से ढकते हुए झेंप मिटाते हुए बोली "क्या बात मुन्ना, क्या चाहिए". मा की आवाज़ सुन मुन्ना को भी एक झटका लगा और उसने अपना सिर नीचे करते हुए कहा, कुच्छ नही मैं तो पुच्छने आया था की शाम में फंक्षन कब शुरू होगा मेरे दोस्त पुच्छ रहे थे"

गीता देवी अब अपने आप को संभाल चुकी थी और अब उसके अंदर ग्लानि और गुस्सा दोनो भाव पैदा हो गये थे. उसने धीमे स्वर में जवाब दिया "तुझे पता नही है क्या जो 6-7 बजे से फंक्षन शुरू हो जाएगा. और क्या बात थी"

"वो मुझे भूख भी लगी थी"

"तो नौकरानी से माँग लेना था, जा उस को बोल के माँग ले"

मुन्ना वाहा से चला गया. आया ने झट से उठ कर दरवाजा बंद किया और चौधरैयन ने अपने कपड़े ठीक किए. आया बोलने लगी की "दरवाजा तो ठीक से बंद ही था मगर लगता है पूरी तरह से बंद नही हुआ था, पर इतना ध्यान रखने की ज़रूरत तो कभी रही नही क्यों की आम तौर पर आपके कमरे में तो कोई आता नही"

"चल जाने दे जो हुआ सो हुआ क्या कर सकते है" इतना बोल कर चौधरैयन चुप हो गई मगर उसके मन में एक गाँठ बन गई और अपने ही बेटे के सामने नंगे होने का अपराध बोध उस हावी हो गया.

अब सुनिए अपने मुन्ना बाबू की बात:-------

मुन्ना जब अपने मा के कमरे से निकला तब उसका दिमाग़ एक दम से काम नही कर रहा था. उसने आज तक अपनी मा का ऐसा रूप नही देखा. मतल्ब नंगा तो कभी नही देखा था. मगर आज गीता देवी का जो सुहाना रूप उसके सामने आया था उसने तो उसके होश उड़ा दिए थे. वो एक बदहवास हो चुका था. मा की गोरी गोरी मखमली जंघे और अल्फान्सो आम के जैसी चुचियों ने उसके होश उड़ा दिए थे. उसके दिमाग़ में रह रह कर मोटी जाँघो के बीच की काली-काली झांते उभर जाती थी. उसकी भूख मर चुकी थी. वो सीधा अपने कमरे में चला गया और दरवाजा बंद कर के तकियों के बीच अपने सिर को छुपा लिया. बंद आँखो के बीच जब मा के खूबसूरत चेहरे के साथ उसकी पलंग पर अस्त-वयस्त हालत में लेटी हुई तस्वीर जब उभरी तो धीरे-धीरे उसके लंड में हरकत होने लगी.

वैसे अपने मुन्ना बाबू कोई सीधे-सादे संत नही है इतना तो पता चल गया होगा. मगर आपको ये जान कर असचर्या होगा की अब से 2 साल पहले तक सच मुच में अपने राजा बाबू उर्फ मनोज उर्फ मन्नू बड़े प्यारे से भोले भाले लड़के हुआ करते थे. जब 15 साल के हुए और अंगो में आए प्रिवर्तन को स्मझने लगे तब बेचारे बहुत परेशान रहने लगे. लंड बिना बात के खड़ा हो जाता था. पेशाब लगी हो तब भी और मन में कुच्छ ख्याल आ जाए तब भी. करे तो क्या करे. स्कूल में सारे दोस्तो ने अंडरवेर पहनना शुरू कर दिया था. मगर अपने भोलू राम के पास तो केवल पॅंट थी. कभी अंडरवेर पहना ही नही. लंड भी मुन्ना बाबू का औकात से कुच्छ ज़यादा ही बड़ा था, फुल-पॅंट में तो थोड़ा ठीक रहता था पर अगर जनाब पाजामे में खेल रहे होते तो, दौड़ते समय इधर उधर डोलने लगता था.जो कि उपर दिखता था और हाफ पॅंट में तो और मुसीबत होती थी अगर कभी घुटने मोड़ कर पलंग पर बैठे हो तो जाँघो के पास के ढीली मोहरी से अंदर का नज़ारा दिख जाता था. बेचारे किसी कह भी नही पाते थे कि मुझे अंडरवेर ला दो क्योंकि रहते थे मामा मामी के पास, वाहा मामा या मामी से कुच्छ भी बोलने में बड़ी शरम आती थी. गाँव काफ़ी दीनो से गये नही थे. बेचारे बारे परेशान थे.

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15-07-2014, 02:06 AM
Post: #14

सौभाग्या से मुन्ना बाबू की मामी हासमुख स्वाभाव की थी और अपने मुन्ना बाबू से थोड़ा बहुत हसी मज़ाक भी कर लेती थी. उसने कई बार ये नोटीस किया था कि मुन्ना बाबू से अपना लंड सम्भाले नही स्म्भल रहा है. सुभह-सुभह तो लग-भग हर रोज उसको मुन्ना के खड़े लंड का दर्शन हो जाता था. जब मुन्ना को उठाने जाती और वो उठ कर दनदनाता हुआ सीधा बाथरूम की ओर भागता था. मुन्ना की ये मुसीबत देख कर मामी को बड़ा मज़ा आता था. एक बार जब मुन्ना अपने पलंग पर बैठ कर पढ़ाई कर रहा था तब वो भी उसके सामने प्लन्ग पर बैठ गई. मुन्ना ने उस दिन संयोग से खूब ढीला ढाला हाफ पॅंट पहन रखा था. मुन्ना पालती मार कर बैठ कर पढ़ाई कर रहा था. सामने मामी भी एक मेग्ज़ीन खोल कर देख रही थी. पढ़ते पढ़ते मुन्ना ने अपना एक पैर खोल कर घुटने के पास से हल्का सा मोड़ कर सामने फैला दिया. इस स्थिति में उसके जाँघो के पास की हाफ-पॅंट की मोहरी नीचे ढूलक गई और सामने से जब मामी जी की नज़र पड़ी तो वो दंग रह गई. मुन्ना बाबू का मुस्टंडा लंड जो की अभी सोई हुई हालत में भी करीब तीन चार इंच लंबा दिख रहा था अपने लाल सुपरे की आँखो से मामी जी की ओर ताक रहा था.

उर्मिला जी इस नज़ारे को ललचाई नज़रो से एकटक देखे जा रही थी. उसकी आँखे वहाँ से हटाए नही हट रही थी. वो सोचने लगी की जब इस छ्होकरे का सोया हुआ है, तब इतना लंबा दिख रहा है, जब जाग कर खड़ा होता होगा तब कितना बड़ा दिखता होगा. उसके पति यानी कि मुन्ना के मामा का तो बमुश्किल साढ़े पाँच इंच का था. अब तक उसने मुन्ना के मामा के अलावा और किसी का लंड नही देखा था मगर इतनी उमर होने के कारण इतना तो ज्ञान था ही मोटे और लंबे लंड कितना मज़ा देते है.
अचानक मन्नू की नज़र अपनी मामी उर्मिला देवी पर पड़ी वो बड़े गौर से उसके पेरॉं की तरफ देख रहीं थी तब मन्नू को अहसास हुआ मामी उसके लॅंड को ही देख रही है मन्नू ने अपने पैर को मोड़ लिया ओर मामी की तरफ देखा उर्मिला देवी मन्नू को अपनी ओर देखते पाकर हॅडबड़ा गई और अपनी नज़रें मेग्ज़ीन पर लगा ली
कुच्छ देर तक दोनो ऐसे ही शर्मिंदगी के अहसास में डूबे हुए बैठे रहे फिर उर्मिला देवी वाहा से उठ कर चली गई.

उस दिन की घटना ने दोनो के बीच एक हिचक की दीवार खड़ी कर दी. दोनो अब जब बाते करते तो थोड़ा नज़रे चुरा कर करते थे. उर्मिला देवी अब मन्नू को बड़े गौर से देखती थी. पाजामे में उसके हिलते डुलते लंड और हाफ पॅंट से झाँकते हुए लंड को देखने की फिराक में रहती थी. मन्नू भी सोच में डूबा रहता था कि मामी उसके लंड को क्यों देख रही थी. ऐसा वो क्यों कर रही थी. बड़ा परेशान था बेचारा. मामी जी भी अलग फिराक में लग गई थी. वो सोच रही थी क्या ऐसा हो सकता है कि मैं मन्नू के इस मस्ताने हथियार का मज़ा चख सकु. कैसे क्या करे ये उनकी समझ में नही आ रहा था. फिर उन्होने एक रास्ता खोज़ा.

अब उर्मिला देवी ने अब नज़रे चुराने की जगह मन्नू से आँखे मिलाने का फ़ैसला कर लिया था. वो अब मन्नू की आँखो में अपने रूप की मस्ती घोलना चाहती थी. देखने में तो वो माशा अल्लाह शुरू से खूबसूरत थी. मन्नू के सामने अब वो खुल कर अंग प्रदर्शन करने लगी थी. जैसे जब भी वो मन्नू के सामने बैठती थी तो अपनी साड़ी को घुटनो तक उपर उठा कर बैठती, साडी का आँचल तो दिन में ना जाने कितनी बार ढूलक जाता था (जबकि पहले ऐसा नही होता था), झाड़ू लगाते समय तो ब्लाउस के दोनो बटन खुले होते थे और उनमे से उनकी मस्तानी चुचिया झलकती रहती थी. बाथरूम से कई बार केवल पेटिकोट और ब्लाउस या ब्रा में बाहर निकल कर अपने बेडरूम में समान लाने जाती फिर वापस आती फिर जाती फिर वापस आती. नहाने के बाद बाथरूम से केवल एक लंबा वाला तौलिया लपेट कर बाहर निकल जाती थी. बेचारा मन्नू बीच ड्रॉयिंग रूम में बैठ ये सारा नज़ारा देखता रहता था. लरकियों को देख कर उसका लंड खड़ा तो होने लगा था मगर कभी सोचा नही था की मामी को देख के भी लंड खड़ा होगा. लंड तो लंड है वो कहा कुच्छ देखता है. उसको अगर चिकनी चमड़ी वाला खूबसूरत बदन दिखेगा तो खड़ा तो होगा ही. मामी जी उसको ये दिखा रही थी और वो खड़ा हो रहा था.

मन्नू को उसी दौरान राज शर्मा की सेक्सी कहानियो की एक किताब हाथ लग गई. किताब पढ़ कर जब लंड खड़ा हुआ और उसको मुठिया कर जब अपना पानी निकाला तो उसकी तीसरी आँख खुल गई. उसकी स्मझ में आ गया की चुदाई क्या होती है और उसमे कितना मज़ा आ सकता है. जब किताब पढ़ के कल्पना करने और मुठियाने में इतना मज़ा है तो फिर सच में अगर चूत में लंड डालने को मिले तो कितना मज़ा आएगा. राज शर्मा की कहानियों में तो रिश्तो में चुदाई की कहानिया भी होती है और एक बार जो वो किताब पढ़ लेता है फिर रिश्ते की औरतो के बारे में उल्टी सीधी बाते सोच ही लेता है चाहे वो ऐसा ना सोचने के लिए कितनी भी कोशिश करे. वही हाल अपने मन्नू बाबा का भी था. वो चाह रहे थे कि अपनी मामी के बारे में ऐसा ना सोचे मगर जब भी वो अपनी मामी के चिकने बदन को देखते तो ऐसा हो जाता था. मामी भी यही चाह रही थी. खूब छल्का छल्का के अपना बदन दिखा रही थी.

बाथरूम से पेशाब करने के बाद साडी को जाँघो तक उठाए बाहर निकल जाती थी. मन्नू की ओर देखे बिना साडी और पेटिकोट को वैसे ही उठाए हुए अपने कमरे में जाती और फिर चूकने की आक्टिंग करते हुए हल्के से मुस्कुराते हुए साडी को नीचे गिरा देती थी. मन्नू भी अब हर रोज इंतेज़ार करता था की कब मामी झाड़ू लगाएँगी और अपनी गुदाज़ चुचियों के दर्शन कराएँगी या फिर कब वो अपनी साडी उठा के उसे अपनी मोटी-मोटी जाँघो के दर्शन कराएँगी. राज शर्मा की कहानियाँ तो अब वो हर रोज पढ़ता था. ज्ञान बढ़ाने के साथ अब उसके दिमाग़ में हर रोज़ नई नई तरकीब सूझने लगी कि कैसे मामी को पटाया जाए. साड़ी उठा के उनकी चूत के दर्शन किए जाए और हो सके तो उसमें अपने हलब्बी लंड को प्रविष्ट कराया जाए और एक बार ही सही मगर चुदाई का मज़ा लिया जाए. सभी तरह के तरकीबो को सोचने के बाद उनकी छ्होटी बुद्धि ने या फिर ये कहे की उनके लंड ने क्योंकि चुदाई की आग में जलता हुआ छ्होकरा लंड से सोचने लगता है, एक तरकीब खोज ली.................



एक दिन मामी जी बाथरूम से तौलिया लपेटे हुए निकली, हर रोज़ की तरह मुन्ना बाबू उनको एक टक घूर घूर कर देखे जा रहे थे. तभी मामी ने मन्नू को आवाज़ दी, "मन्नू ज़रा बाथरूम में कुच्छ कपड़े है, मैं ने धो दिए है ज़रा बाल्कनी में सुखाने के लिए डाल दे". मन्नू जो कि एक टक मामी जी की गोरी चिकनी जाँघो को देख के आनंद लूट रहा था को झटका सा लगा, हॅडबड़ा के नज़रे उठाई और देखा तो सामने मामी अपनी चूचियों पर अपने तौलिए को कस के पकड़े हुए थी. मामी ने हस्ते हुए कहा "जा बेटा जल्दी से सुखाने के लिए डाल दे नही तो कपड़े खराब हो जाएँगे"

मन्नू उठा और जल्दी से बाथरूम में घुस गया. मामी को उसका खरा लंड पाजामे में नज़र आ गया. वो हस्ते हुए चुप चाप अपने कमरे में चली गई. मन्नू ने कपड़ो की बाल्टी उठाई और फिर ब्लॉकोनी में जा कर एक एक करके सूखने के लिए डालने लगा. मामी की पॅंटी और ब्रा को सुखाने के लिए डालने से पहले एक बार अच्छी तरह से च्छू कर देखता रहा फिर अपने होंठो तक ले गया और सूंघने लगा. तभी मामी कमरे से निकली तो ये देख कर जल्दी से उसने वो कपड़े सूखने के लिए डाल दिए.

शाम में जब सूखे हुए कपड़ो को उठाते समय मन्नू भी मामी की मदद करने लगा. मन्नू ने अपने मामा का सूखा हुआ अंडरवेर अपने हाथ में लिया और धीरे से मामी के पास गया. मामी ने उसकी ओर देखते हुए पुचछा "क्या है, कोई बात बोलनी है"? मन्नू थोड़ा सा हकलाते हुए बोला:-

"माआअम्म्म्मी...एक बात बोलनी थी"

"हा तो बोल ना"

"मामी मेरे सारे दोस्त अब ब्ब्ब्ब्बबब"

"अब क्या ......" उर्मिला देवी ने अपनी तीखी नज़रे उसके चेहरे पर गढा रखी थी.

"मामी मेरे सारे दोस्त अब उन.... अंडर....... अंडरवेर पहनते है"

मामी को हसी आ गई, मगर अपनी हसी रोकते हुए पूछा "हा तो इसमे क्या है सभी लड़के पहनते है"

"पर पर मामी मेरे पास अंडरवेर नही है"

मामी एक पल के लिए ठिठक गई और उसका चेहरा देखने लगी. मन्नू को लग रहा था इस पल में वो शर्म से मर जाएगा उसने अपनी गर्दन नीचे झुका ली.

उर्मिला देवी ने उसकी ओर देखते हुए कहा "तुझे भी अंडरवेर चाहिए क्या"

"हा मामी मुझे भी अंडरवेर दिलवा दो ना"

"हम तो सोचते थे की तू अभी बच्चा है, मगर" कह कर वो हस्ने लगी. मन्नू ने इस पर बुरा सा मुँह बनाया और रोआन्सा होते हुए बोला "मेरे सारे दोस्त काफ़ी दीनो से अंडरवेर पहन रहे है, मुझे बहुत बुरा लगता है बिना अंडरवेर के पॅंट पहन ना."

उर्मिला देवी ने अब अपनी नज़रे सीधे पॅंट के उपर टीका दी और हल्की मुस्कुराहट के साथ बोली "कोई बात नही, कल बाज़ार चलेंगे साथ में". मन्नू खुश होता हुआ बोला "थॅंक यू मामी". फिर सारे कपड़े समेत दोनो अपने अपने कमरो में चले गये.

वैसे तो मन्नू कई बार मामी के साथ बाज़ार जा चुका था. मगर आज कुच्छ नई बात लग रही थी. दोनो खूब बन सवर के निकले थे. उर्मिला देवी ने आज बहुत दीनो के बाद काले रंग की सलवार कमीज़ पहन रखी थी और मन्नू को टाइट जीन्स पहनवा दिया था. हालाँकि मन्नू अपनी ढीली पॅंट ही पहना चाहता था मगर मामी के ज़ोर देने पर बेचारा क्या करता. कार मामी खूद ड्राइव कर रही थी. काले सलवार समीज़ में बहुत सुंदर लग रही थी. हाइ हील की सॅंडल पहन रख थी. टाइट जीन्स में मन्नू का लंड नीचे की तरफ हो कर उसकी जाँघो से चिपका हुआ एक केले की तरह से साफ पता चल रहा था. उसने अपनी टी-शर्ट को बाहर निकाल लिया पर जब वो कार में मामी के बगल में बैठा तो फिर वही ढाक के तीन पाट, सब कुच्छ दिख रहा था. मामी अपनी तिर्छि नज़रो से उसको देखते हुए मुस्कुरा रही थी. मन्नू बड़ी परेशानी महसूस कर रहा था. खैर मामी ने कार एक दुकान पर रोक ली. वो एक बहुत ही बड़ी दुकान थी. दुकान में सारे सेल्सरेप्रेज़ेंटेटिव लरकियाँ थी. एक सेलेज़्गर्ल के पास पहुच कर मामी ने मुस्कुराते हुए उस से कहा इनके साइज़ का अंडरवेर दिखाइए. सेल्समन ने घूर कर उसकी ओर देखा जैसे वो अपनी आँखो से ही उसकी साइज़ का पता लगा लेगी. फिर मन्नू से पुचछा आप बनियान कितने साइज़ का पहनते हो. मन्नू ने अपना साइज़ बता दिया और उसने उसी साइज़ का अंडरवेर ला कर उसे ट्राइयल रूम में ले जा कर ट्राइ करने को कहा. ट्राइयल रूम में जब मन्नू ने अंडरवेर पहना तो उसे बहुत टाइट लगा. उसने बाहर आ कर नज़रे झुकाए हुए ही कहा "ये तो बहुत टाइट है". इस पर मामी हस्ने लगी और बोली "हमारा मन्नू बेटा नीचे से कुच्छ ज़यादा ही बड़ा है, एक साइज़ बड़ा ला दो" . उर्मिला देवी की ये बात सुन कर सेलेज़्गर्ल का चेहरा भी लाल हो गया. वो हॅडबड़ा कर पिछे भागी और एक साइज़ बड़ा अंडरवेर ला कर दे दिया और बोली पॅक करा देती हू ये फिट आ जाएगी. मामी ने पुचछा "क्यों मन्नू एक बार और ट्राइ करेगा या फिर पॅक करवा ले".
"नही पॅक करवा लीजिए"

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18-07-2014, 05:40 AM
Post: #15
"ठीक है दो अंडरवेर पॅक कर दो, और मेरे लिए कुच्छ दिखाओ". मामी के मुँह से ये बात सुन कर मन्नू चौंक गया. मामी क्या खरीदना चाहती है अपने लिए. यहा तो केवल पॅंटी और ब्रा मिलेगी. सेलेज़्गर्ल मुस्कुराते हुए पिछे घूमी और मामी के सामने गुलाबी, काले, सफेद, नीले रंगो के ब्रा और पॅंटीस की ढेर लगा दिए. मामी हर ब्रा को एक एक कर के उठाती जाती और फैला फैला कर देखती फिर मन्नू की ओर घूम कर जैसे की उस से पुच्छ रही हो बोलती "ये ठीक रहेगी क्या, मोटे कप्डे की है, सॉफ्ट नही है या फिर इसका कलर ठीक है क्या" मन्नू हर बात पर केवल अपना सिर हिला कर रह जाता था. उसका तो दिमाग़ घूम गया था. उर्मिला देवी पॅंटीस को उठा उठा के फैला के देखती. उनकी एलास्टिक चेक करती फिर छोड़ देती. कुच्छ देर तक ऐसे ही देखने के बाद उन्होने तीन ब्रा और तीन पॅंटीस खरीद ली. मन्नू को तीनो ब्रा आंड पॅंटीस काफ़ी छ्होटी लगी. मगर उसने कुच्छ नही कहा. सारा समान पॅक करवा कर कर की पिच्छली सीट पर डालने के बाद मामी ने पुचछा "अब कहा चलना है",

मन्नू ने कहा "घर चलिए, अब और कहा चलना है". इस पर मामी बोली "अभी घर जा कर क्या करोगे चलो थोड़ा कही घूमते है.

"ठीक है" कह कर मन्नू भी कार में बैठ गया. फिर उसका टी-शर्ट थोड़ा सा उँचा हो गया पर इस बार मन्नू को कोई फिकर नही थी. मामी ने उसकी ओर देखा और देख कर हल्के से मुस्कुरई. मामी से नज़रे मिलने पर मन्नू भी थोड़ा सा शरमाते हुए मुस्कुराया फिर खुद ही बोल पड़ा "वो मैं ट्राइयल रूम में जा कर अंडरवेर पहन आया था". मामी इस पर हस्ते हुए बोली "वा रे छ्होरे बड़ा होसियार निकला तू तो, मैने तो अपना ट्राइ भी नही किया और तुम पहन कर घूम भी रहे हो, अब कैसा लग रहा है"

"बहुत कंफर्टबल लग रहा है, बड़ी परेशानी होती थी""मुझे कहा पता था की इतना बड़ा हो गया है, नही तो कब की दिला देती"

मामी के इस दुहरे अर्थ वाली बात को स्मझ कर मुन्ना बेचारा चुपचाप मुस्कुरा कर रह गया. मामी कार ड्राइव करने लगी. घर पर मामा और बड़ी बहन काजल दोनो नही थे. मामा अपने बिज़्नेस टूर पर और काजल कॉलेज ट्रिप पर. सो दोनो मामी भांजा शाम के सात बजे तक घूमते रहे. शाम में कार पार्किंग में लगा कर दोनो माल में घूम रहे थे कि बारिश शुरू हो गई. बड़ी देर तक तेज बारिश होती रही. जब 8 बजने को आए तो दोनो ने माल से पार्किंग तक का सफ़र भाग कर तय करने की कोशिश की, और इस चक्कर में दोनो के दोनो पूरी तरह से भीग गये. जल्दी से कार का दरवाजा खोल झट से अंदर घुस गये. मामी ने अपने गीले दुपट्टे से ही अपने चेहरे और बाँहो को पोच्छा और फिर उसको पिच्छली सीट पर फेंक दिया. मन्नू ने भी हॅंकी से अपने चेहरे को पोछ लिया. मामी उसकी ओर देखते हुए बोली "पूरे कपड़े गीले हो गये"

"हा मैं भी गीला हो गया हू". बारिश से भीग जाने के कारण मामी की समीज़ उनके बदन से चिपक गई थी और उनकी सफेद ब्रा के स्ट्रॅप नज़र आ रहे थे. समीज़ चूकि स्लीवलेशस थी इसलिए मामी की गोरी गोरी बाँहे गजब की खूबसूरत लग रही थी. उन्होने दाहिने कलाई में एक पतला सा सोने का कड़ा पहन रखा था और दूसरे हाथ में पतले स्ट्रॅप की घड़ी बाँध रखी थी. उनकी उंगलियाँ पतली पतली थी और नाख़ून लूंबे लूंबे जिन पर पिंक कलर की सुनहरी नाइल पोलिश लगी हुई थी. स्टियरिंग को पकड़ने के कारण उनका हाथ थोड़ा उँचा हो गया था जिस के कारण उनकी चिकनी चिकनी कानखो के दर्शन भी मन्नू को आराम से हो रहे थे. बारिस के पानी से भीग कर मामी का बदन और भी सुनहरा हो गया था. बालो की एक लट उनके गालो पर अठखेलिया खेल रही थी. मामी के इस खूबसूरत रूप को निहार कर मन्नू का लंड खड़ा हो गया था.

घर पहुच कर कार को पार्किंग में लगा कर लॉन पार करते हुए दोनो घर के दरवाजे की ओर चल दिए. बारिश दोनो को भीगा रही थी. दोनो के कपड़े बदन से पूरी तरह से चिपक गये थे. मामी की समीज़ उनके बदन से चिपक कर उनकी चुचियों को और भी ज़यादा उभार रही थी. चुस्त सलवार उनके बदन उनके जाँघो से चिपक कर उनकी मोटी जाँघो का मदमस्त नज़ारा दिखा रही थी. समीज़ चिपक कर मामी की गांद की दरार में घुस गई थी. मन्नू पिछे पिछे चलते हुए अपने लंड को खड़ा कर रहा था. तभी लॉन की घास पर मामी का पैर फिसला और वो पिछे की तरफ गिर पारी. उनका एक पैर लग भग मूड गया था और वो मन्नू के उपर गिर पड़ी जो ठीक उनके पिछे चल रहा था. मामी मन्नू के उपर गिरी हुई थी. मामी के मदमस्त चूतर मन्नू के लंड से सॅट गये. मामी को शायद मन्नू के खड़े लंड का एहसास हो गया था उसने अपने चूतरो को लंड पर थोड़ा और दबा दिया और फिर आराम से उठ गई. मन्नू भी उठ कर बैठ गया. मामी ने उसकी ओर मुस्कुराते हुए देखा और बोली "बारिश में गिरने का भी अपना अलग ही मज़ा है".

"कपड़े तो पूरे खराब हो गये मामी"

"हॅ तेरे नये अंडरवेर का अच्छा उदघाटन हो गया" मन्नू हस्ने लगा. घर के अंदर पहुच कर जल्दी से अपने अपने कमरो की ओर भागे. मन्नू ने फिर से हाफ पॅंट और एक टी-शर्ट डाल ली और गंदे कपड़ो को बाथरूम में डाल दिया. कुच्छ देर में मामी भी अपने कमरे से निकली. मामी ने अभी एक बड़ी खूबसूरत सी गुलाबी रंग की नाइटी पहन रखी थी. मॅक्सी के जैसी स्लीव्लेस्स नाइटी थी. नाइटी कमर से उपर तक तो ट्रॅन्स्परेंट लग रही थी मगर उसके नीचे शायद मामी ने नाइटी के अंदर पेटिकोट पहन रखा था इसलिए वो ट्रॅन्स्परेंट नही दिख रही थी.

उर्मिला देवी किचन में घुस गई और मन्नू ड्रॉयिंग रूम में मस्ती से बैठ कर टेलीविज़न देखने लगा. उसने दूसरा वाला अंडरवेर भी पहन रखा था अब उसे लंड के खड़े होने पर पकड़े जाने की कोई चिंता नही थी. किचन में दिन की कुच्छ सब्जिया और दाल पड़ी हुई थी. चावल बना कर मामी उसके पास आई और बोली "चल कुच्छ खाना खा ले". खाना खा कर सारे बर्तन सिंक में डाल कर मामी ड्रॉयिंग रूम में बैठ गई और मन्नू भी अपने लिए मॅंगो शेक ले कर आया और सामने के सोफे पर बैठ गया. मामी ने अपने पैर को उठा कर अपने सामने रखी एक छ्होटी टेबल पर रख दिया और नाइटी को घुटनो तक खींच लिया था. घुटनो तक के गोरे गोरे पैर दिख रहे थे. बड़े खूबसूरत पैर थे मामी के. तभी मन्नू का ध्यान उर्मिला देवी के पैरो से हट कर उनके हाथो पर गया. उसने देखा की मामी अपने हाथो से अपने चुचियों को हल्के हल्के खुज़ला रही थी. फिर मामी ने अपने हाथो को पेट पर रख लिया. कुच्छ देर तक ऐसे ही रखने के बाद फिर उनका हाथ उनके दोनो जाँघो के बीच पहुच गया. मन्नू बड़े ध्यान से उनकी ये हरकते देख रहा था. मामी के हाथ ठीक उनकी जाँघो के बीच पहुच गये और वो वाहा खुजली करने लगी. झंघो के ठीक बीच में चूत के उपर हल्के हल्के खुजली करते-करते उनका ध्यान मन्नू की तरफ गया.

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